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Kurds Iran Israel War: 'कुर्द को अपनी लड़ाई में मत घसीटो, हम भाड़े के हथियार नहीं', इराक की फर्स्ट लेडी ने लगाई गुहार

Edited By: Vinay Trivedi Published : Mar 06, 2026 12:38 pm IST, Updated : Mar 06, 2026 12:47 pm IST

Kurdish role in Iran War: इराक की फर्स्ट लेडी शनाज़ इब्राहिम अहमद ने साफ कर दिया है कि Kurds, ईरान और अमेरिका-इजरायल की जंग में नहीं पड़ना चाहते हैं। Kurds पहले भी दूसरों की लड़ाई में अपनी जानें गंवा चुके हैं लेकिन उनका साथ कभी किसी ने नहीं दिया।

Shanaz Ibrahim Ahmed- India TV Hindi
Image Source : AP/@FIRSTLADYOFIRAQ(X) इराक की फर्स्ट लेडी शनाज़ इब्राहिम अहमद ने जंग में ना घसीटने की अपील की।

Iraq First Lady Kurds Statement: इराक की फर्स्ट लेडी शनाज़ इब्राहिम अहमद ने अमेरिका, इजरायल और ईरान से Kurds को जंग में ना घसीटने की गुहार लगाई है। शनाज़ इब्राहिम अहमद के ऑफिस की तरफ से जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज में लिखा है कि हमारे पास अपने अनुभव हैं। खाली वादें भी हमें याद हैं। अक्सर कुर्दों को तभी याद किया जाता है जब उनकी शक्ति या उनके बलिदान की जरूरत होती है। इसी कारण से मैं इस संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से गुहार लगाती हूं कि Kurds को अकेला छोड़ दें। हम किराए पर लड़ने वाले हथियार नहीं हैं।

मुश्किल समय में Kurds को अकेला छोड़ा गया

शनाज़ इब्राहिम अहमद के मुताबिक, सन् 1991 में कुर्दों से कहा गया था कि वे सद्दाम हुसैन के शासन के खिलाफ विद्रोह करें। लेकिन जब परिस्थितियां और प्राथमिकताएं बदलीं, तो उन्हें अकेला उनके हाल पर छोड़ दिया गया। जब उस शासन ने बगावत को कुचलने के लिए हेलीकॉप्टर गनशिप और टैंकों का उपयोग किया, तब हमें बचाने के लिए कोई नहीं आया था। आज भी वो बातें हमारे दिमाग में ताजा हैं और गहराई से दर्ज हैं।

ISIS से जंग के बावजूद सम्मान नहीं मिला

आज हम उस दौर को 'Raparin' के नाम से याद करते हैं और उससे मिले सबक को कभी नहीं भूलते हैं। हाल में हमने ये भी देखा कि नॉर्थ-ईस्ट सीरिया, जिसे रोजावा कहा जाता है, वहां क्या हुआ। तमाम वादों के बावजूद, और ISIS के खिलाफ जंग में सीरिया के कुर्दों के आगे के मोर्चे पर खड़े रहने के बाद भी, हमने देखा कि उनके साथ कैसा व्यवहार हुआ।

Kurds नहीं लड़ना चाहते दूसरों की जंग

आज इराक के कुर्दों ने आखिरकार कुछ हद तक सम्मानजनक जीवन और स्थिरता पा ली है। इसलिए कुर्दों के लिए यह बहुत कठिन, बल्कि करीब-करीब असंभव है कि वे दुनिया की महाशक्तियों के हाथों मोहरे की तरह उपयोग होना स्वीकार करें।

ईरान से इजरायल-अमेरिका की जंग के लेटेस्ट अपडेट्स यहां पढ़ें

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